- जुलाई 2026 सत्र के लिए बायोमेडिकल साइंस और इंजीनियरिंग में 4 वर्षीय बैचलर ऑफ साइंस (बीएस) कार्यक्रम में प्रवेश New
- जुलाई 2026 सेशन के लिए योग्य अंतर्राष्ट्रीय उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं। New
- जुलाई 2026 सत्र के लिए एमबीए कार्यक्रमों में प्रवेश New
- फैकल्टी पदों के लिए SC/ST/OBC-NCL/EWS/PwBD के लिए विशेष भर्ती अभियान
आगामी कार्यक्रम
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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गुवाहाटी, आई आई टी परिवार का छठा सदस्य है, और इस संस्थान की स्थापना वर्ष 1994 में की गई थी | आई आई टी गुवाहाटी का शैक्षणिक कार्यक्रम वर्ष 1995 में आरंभ किया गया था| वर्तमान संस्थान में ग्यारह विभाग, सात अंतर विषयक शैक्षणिक केंद्र तथा पाँच स्कूल हैं जो सभी प्रमुख अभियांत्रिकी, विज्ञान एवं मानविकी विषयों में बी टेक, बी डेज़, बी एस सी(ऑनर्स), एम टेक, एम डेज़, एम एस सी, एम बी ए, एम ए और पीएच डी पाठ्यक्रम प्रदान करते हैं। आई आई टी गुवाहाटी, कम समय के अंदर ही, उन्नत अनुसंधान करने के लिए विश्व स्तर के बुनियादी ढांचे का निर्माण करने में सक्षम हो गया है और संस्थान में अत्याधुनिक वैज्ञानिक तथा अभियांत्रिकी उपकरण उपलब्ध है। शिक्षण और अनुसंधान में अपनी ख्याति प्राप्त करने के अलावा, आई आई टी गुवाहाटी, वर्ष 1994 में अपनी स्थापना के बाद से ही पूर्वोत्तर क्षेत्र के लोगों की आकांक्षाओं को काफी हद तक पूरा करने में सक्षम रहा है।
निदेशक
Prof. Devendra Jalihal
अनुसंधान और नवाचार सभी को देखें
शोधकर्ताओं ने एक किफायती और कुशल 'निष्क्रिय' विकिरण शीतलन प्रणाली तैयार की है जिसे संचालित करने के लिए बिजली की आवश्यकता नहीं होती है|
आई आई टी गुवाहाटी ने कम लागत वाली, पारदर्शी, बायोडिग्रेडेबल घाव-ड्रेसिंग फिल्म का आविष्कार किया जो शरीर को अपने आप ठीक करने में मदद करती है|
IIT-G ने आयुर्वेदिक कायाकल्प करने वाली दवा की क्रियाओं का पता लगाने के लिए आधुनिक तकनीक विकसित की है।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) गुवाहाटी, भारत के शोधकर्ताओं की एक टीम ने एक उन्नत तकनीक विकसित की है जो बैटरी से चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों में चार्ज की स्थिति (एसओसी) का सटीक अनुमान लगा सकती है।
IIT गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने इलेक्ट्रिक वाहनों में उपयोग की जाने वाली रिचार्जेबल लिथियम-आयन बैटरी के समग्र प्रदर्शन को बढ़ावा देने के लिए उन्नत तकनीक विकसित की
IIT गुवाहाटी की टीम ने खोखले फाइबर झिल्ली का उपयोग करके समुद्र के पानी से माइक्रो-प्लास्टिक को हटाया
